जानिए क्या हैं रुद्राक्ष की शक्ति के पीछे के रहस्य।

रुद्राक्ष संस्कृत शब्द से निकलता है। रुद्र + अक्ष का संयोजन है, रुद्र और अक्ष का प्रतीक है, या भगवान शिव की आंसू-बूंदें हैं। किंवदंती यह है कि रुद्रक्ष संयंत्र के रूप में ये आंसू-बूंद पृथ्वी पर गिर गईं। इस प्रकार रुद्राक्ष मोती की प्रसिद्धि शुरू हुई। रुद्राक्ष  शिव का वरदान है, जो संसार के भौतिक दु:खों को दूर करने के लिए प्रभु शंकर ने प्रकट किया है। रुद्राक्ष के बारे में हिंदू पौराणिक कथाओं में कई कहानियां हैं। रुद्राक्ष के संदर्भ हमारे हिंदू पौराणिक कथाओं और शिव पुराण, पद्म पुराण और श्रीमद् भगवतम के वैदिक ग्रंथों में पाए जाते हैं। रुद्राक्ष हिंदू देवता भगवान शिव से जुड़ा हुआ हैं एवं आमतौर पर भक्तों द्वारा सुरक्षा कवच के तौर पर या ओम नमः शिव मंत्र के जाप के लिए पहने जाते हैं।ये बीज मुख्य रूप से भारत और नेपाल में कार्बनिक आभूषणों और माला के रूप में उपयोग किए जाते हैं एवं अर्द्ध कीमती पत्थरों के समान मूल्यवान होते हैं। रुद्राक्ष का आकार हमेशा मिलीमीटर में मापा जाता है। वे मटर के बीज के रूप में छोटे से बड़े होते हैं एवं कुछ लगभग अखरोट के आकार तक पहुंचते हैं।
एकमुखी रुद्राक्ष
ऐसा रुद्राक्ष जिसमें एक ही आँख अथवा बिंदी हो। स्वयं शिव का स्वरूप है जो सभी प्रकार के सुख, मोक्ष और उन्नति प्रदान करता है।
द्विमुखी रुद्राक्ष
सभी प्रकार की कामनाओं को पूरा करने वाला तथा दांपत्य जीवन में सुख, शांति व तेज प्रदान करता है।
त्रिमुखी रुद्राक्ष
समस्त भोग-ऐश्वर्य प्रदान करने वाला होता है।

चतुर्थमुखी रुद्राक्ष
धर्म, अर्थ काम एवं मोक्ष प्रदान करने वाला होता है।
पंचमुखी रुद्राक्ष
सुख प्रदान करने वाला।
षष्ठमुखी रुद्राक्ष
पापों से मुक्ति एवं संतान देने वाला होता होता है।
सप्तमुखी रुद्राक्ष
दरिद्रता को दूर करने वाला होता है।
अष्टमुखी रुद्राक्ष
आयु एवं सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला होता है।
नवममुखी रुद्राक्ष
मृत्यु के डर से मुक्त करने वाला होता है।
दसमुखी रुद्राक्ष
शांति एवं सौंदर्य प्रदान करने वाला होता है।
ग्यारह मुखी रुद्राक्ष
विजय दिलाने वाला, ज्ञान एवं भक्ति प्रदान करने वाला होता है।
बारह मुखी रुद्राक्ष
धन प्राप्ति कराता है।
तरेह मुखी रुद्राक्ष
शुभ व लाभ प्रदान कराने वाला होता है।
चौदह मुखी रुद्राक्ष
संपूर्ण पापों को नष्ट करने वाला होता है।

 

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